खबरवादी ,
पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार ने अचानक से 3 नवंबर को 10 रुपये का टैक्स कम कर दिया, जिसे दीपावली का तोहफा कहा गया। 3 और 4 नवंबर तक हमने हर तरफ इसको लेकर नजर बनाए रखी। बीजेपी नेताओं ने इसे दीपावली का तोहफा कहा तो विपक्षी दलों ने देश के अलग – अलग राज्यों में उपचुनाव में हुई कई जगह बीजेपी की हार के चलते यह कदम केंद्र सरकार को उठाने पर मजबूर होना पड़ा कहा। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है, जिसमें अधिकांश इसे वोट की चोट का नतीजा बता रहे हैं।
देश के अलग – अलग राज्यों में कुछ लोकसभा और अधिकांश विधानसभा सीटाें पर हुए उपचुनाव के नतीजे 2 नवंबर को पूरी तरह से सामने आ गए। जिसमें बीजेपी को कहीं जीत हासिल हुई, लेकिन कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी मजबूती सामने रखते हुए जीत हासिल की। बीजेपी शासित राज्य हरियाणा के ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी और जेजेपी के संयुक्त उम्मीदवार को आईएनएलडी उम्मीदवार ने हरा दिया। 3 नवंबर को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लग रहे टैक्स में 10 रुपये कटौती की घोषणा की, जिसके बाद बीजेपी नेताओं में इसका श्रेय लेने की जहां होड़ लग गई, वहीं विपक्षी दलों ने इसे बीजेपी की उपचुनाव में कई जगह हुई हार के चलते उठाया गया कदम बताया। ट्विटर पर पृथला से कांग्रेस नेता रघुवीर सिंह तेवतिया ने एक ट्विट को शेयर किया जिसमें लिखा गया कि 2021 में पेट्रोल को 28 रुपया और डीजल को 26 रुपया बढ़ाने के बाद 14 सीटों पर चुनाव हारने के कारण पेट्रोल और डीजल को क्रमश: 5 रुपया और 10 रुपया घटाने को सरकारी लोग प्रधानमंत्री का तोहफा बता रहे हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर लोगों में यह बहस छिड़ गई कि यह प्रधानमंत्री का तोहफा है या वोट की चोट का नतीजा। चुटीले अंदाज में लोगों ने यह भी शेयर किया कि पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइन है गाड़ी का टैंक फुल कराने के लिए कि कहीं रेट फिर से न बढ़ जाएं। महंगाई से त्रस्त आम आदमी की तरफ से कुछ विपक्षी दल के नेता सोशल मीडिया पर उन लोगों का भी शुक्रिया अदा कर रहे हैं, जिन्होंने बीजेपी को वोट नहीं दिया। अब यह तय आप को करना है कि यह वोट की चोट का नतीजा है या फिर केंद्र सरकार की तरफ से आपको तोहफा।

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