फरीदाबाद,

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश से अरूआ व साहुपुरा गांवों पर तोडफोड़ का संकट गहराया हुआ है। न्यायालय के आदेश पर एसडीएम ने मार्च में इन दोनों गांवों के ग्रामीणों को पंचायती जमीन से बेदखल करने के नोटिस जारी किए थे। 30 सितंबर को दोनों गांवों में तोड़फोड़ की कार्रवाई होनी थी, मगर किन्ही कारणों के कारण कार्रवाई स्थगित हो गई। साहुपुरा खादर गांव की आबादी 1924 में यमुना में बाढ़ आने के कारण कटाव होने से बह गई। तब गांव में मात्र 50 कच्चे घरों की आबादी थी। अंग्रेजी जमाने में इस गांव को गुडगांव के तत्कालीन  डीसी एलएफएन ब्रेन ने अरुआ की पंचायती जमीन में बसा दिया। ग्रामीणों को बेदखल करके निर्माण तोड़ने के लिए नोटिस दिए जा चुके हैं। विधायक राजेश नागर व नयनपाल रावत ने सीएम मनोहर लाल से मुलाकात कर कहा कि दोनों गांवों को बचाने के लिए पॉलिसी बनाए जाए ताकि ग्रामीणों के सैंकडों साल पुराने आशियाने बच सकें। शाहजहांपुर गांव को भी डीसी ने पॉलिसी बनाकर बचाया है। सीएम ने दोनों विधायकों को हरसंभव प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया।

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