– सड़क पर नाव चल गई, सोशल मीडिया पर मजाक उड़ गया, लेकिन कोई गंभीरता से नहीं लेता

सुमन जाखड़, फरीदाबाद

शहर में बारिशों के दिनों में जलभराव कोई नई बात नहीं है। भले ही कांग्रेसी नेता इसको लेकर सड़क पर नाव चला रहे हैं, लेकिन उनको भी याद होना चाहिए कि जब कांग्रेस सरकार 10 साल सत्ता में थी तब भी जलभराव शहर की एक बड़ी समस्या थी, लेकिन संभवत: इतनी बड़ी नहीं थी कि सड़क पर नाव चल सकें। कहने को शहर को स्मार्ट सिटी कहा जा सकता है लेकिन जरा सी बारिश होने पर लोगों को सड़कों पर से निकलने की जगह नहीं मिलती। सत्ताधारी दल बीजेपी के मंत्री हों या नेता से लेकर अधिकारी इससे आंखें मूंदे बैठे हैं और अब लोगों को भी आदत सी पड़ गई है कि सुधार तो कुछ होना नहीं है।

सालों पहले दिल्ली – एनसीआर में फरीदाबाद को झीलों के शहर के नाम से भी जाना जाता था। इनमें सूरजकुंड और बड़खल झील प्रमुख थीं। सूरजकुंड के साथ मौजूद मयूर झील और कुंड में भरा पानी लोगों को आकर्षित करता था। समय के साथ यह तो सब सूख गए, लेकिन बारिश के मौसम में पानी सड़कों पर भरने लगा। कांग्रेस के बीते 10 साल हों तब भी पानी सड़कों पर भरता था, लेकिन बीजेपी सरकार ने सड़कों को चौड़ा तो किया लेकिन खराब इंजीनियरिंग का नमूना भी देखने को मिला, जब हर उस जगह पर बारिशों में पानी भरा जहां सालों से भरता था। कांग्रेस नेता सुमित गौड़ ने तो सड़क पर भरे पानी में नाव भी चला दी और संबंधित बीजेपी विधायक के पास तक पहुंच गए। फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र को सबसे पॉश माना जाता है और यहां पर जलभराव बहुत बड़ी समस्या है। नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा है, राज्य सरकार बीजेपी की है और केंद्र सरकार भी, जिसने फरीदाबाद को स्मार्ट सिटी घोषित किया। इसके बावजूद हाल बेहाल हैं। जब साल 2014 में राज्य सरकार बीजेपी की बनी थी तो बड़खल विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक बनीं सीमा त्रिखा ने दावा किया था कि वह सूख चुकी बड़खल झील को फिर से भर देंगी। बीजेपी सरकार का दूसरा दौर भी आ गया और बड़खल विधानसभा क्षेत्र से दोबारा सीमा त्रिखा बीजेपी विधायक चुनकर आ गईं, बड़खल झील तो भरी नहीं लेकिन विधानसभा क्षेत्र पानी में डूब गया। सोशल मीडिया पर इसका मखौल उड़ना शुरू हो चुका है। एसके शर्मा ने सोशल मीडिया पर जिला उपायुक्त के घर के बाहर की फोटो डाली है, जहां पर जलभराव है। सुरक्षा को लेकर मुहिम पुलिस से लेकर सामाजिक संगठन चला रहे हैं, लेकिन जलभराव को लेकर नहीं। जितना पानी सड़कों से सीवर में बह जाता है, यदि वह जमीन के अंदर चला जाए तो भूजल स्तर में भी सुधार हो, लेकिन भूजल स्तर बढ़ाने के लिए जो सरकारी योजनाएं बनाई गई हैं, वह भू स्तर तक पहुंची ही नहीं हैं।

हम किसी अधिकारी से जवाब नहीं मांगते कि ऐसा क्यों हो रहा है। उनका दायित्व शहर और प्रकृति के प्रति बनता है कि वह इस समस्या का समाधान करें, नहीं तो आखिर में जनता को ही इस समस्या का समाधान करने के लिए आगे आना होगा।

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