पलवल,
सिविल सर्जन डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि कोविड संक्रमण से ठीक हुए व्यक्ति आयुर्वेद एवं योग का पालन करके फिर से अपने शरीर को स्वस्थ्य बना सकते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डा. मोहम्मद इरफान ने बताया है कि आयुष मंत्रालय ने पोस्ट कोविड मरीजों के लिए गाइडलाइंस जारी की है, जो कोरोना के संक्रमण के पश्चात होने वाली समस्याओं जैसे भूख न लगना, खाना न पचना, कब्ज की शिकायत होना, फैंफड़ों का कमजोर होना, लगातार गले में खराश, खांसी होना, सांस फूलना, निंद्रा न आना, कमजोरी होना आदि की संभावना होती है। इसके लिए सभी लोग नियमित रूप से आयुर्वेदिक दिनचर्या, योग, आहार-विहार (रहन-सहन) एवं औषधियों का सेवन आयुष चिकित्सक की देखरेख में करें तो इन समस्याओं का निराकरण किया जा सकता है।उन्होंने बताया की सुबह 4 से 5 बजे के बीच जागकर नित्य कर्म करें, फिर खाली पेट 3 से 4 गिलास गुनगुना पानी पिएं, इससे दिन में थकावट आदि नहीं होती है। इसके बाद 40 मिनट तक प्रतिदिन योग करें, जिससे शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है, एवं मन भी मजबूत होता है। जो अवसाद, मनोवैचित आदि को दूर करने में सहायक है। इसी प्रकार प्राणायाम, भस्त्रिका, कपालभांति, भ्रामरी जैसे योग फेंफड़ों को ताकत देते है जो रोगियों के संक्रमण के बाद कमजोर फेंफड़ों को पुन: मजबूत करेगा। योग के बाद नाक के दोनो नथुनों में अणु तैल की दो- दो बूंदें लेटकर डालें। हल्का नाश्ता लें, नाश्ते में इलाइची पका दूध, गोल्डन मिल्क लें, फलों में अनार का सेवन करें, प्रारंभ में हल्का-फुल्का कार्य करें, अति मेहनत वाले कार्यों से बचें, कार्य की अवधि को साप्ताहिक रूप से बढ़ाएं, दिन में दोपहर के भोजन में मूंग की दाल, सलाद, रोटी का सेवन करें, खाना मातृपूर्वक खाएं, खाने के बीच में पानी अवश्य पिएं, इसके पश्चात दिन में यदि चाय पीने का मन हो तो आयुष काढ़ा (तुलसी, कालीमिर्च, दालचीनी, सोंठ) का सेवन करें, इसमें मुनक्का मिलाकर दिन में दो बार करें। शाम का भोजन सूर्यास्त से पहले करने की आदत डालें, जिससे रात्रि में शयन से पहले खाना भली भांति पच जाता है। शाम के बाद मोबाइल फोन, टीवी का प्रयोग न करें, परिवार के साथ अधिक समय बचाएं।
आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉक्टर सूरजभान ने बताया की कमजोरी महसूस कर रहे व्यक्ति प्रतिदिन एक-एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन करें और ऊपर से गुनगुना दूध पिएं। यदि भूख, कब्ज की शिकायत होने पर प्रतिदिन रात्रि में सोते समय त्रिफला चूर्ण का सेवन गुनगुने पानी से अथवा शहद में मिलाकर सेवन करें और किसी भी आयुष औषधि को अथवा किसी भी बीमारी के लिए अपने नजदीक में स्थित आयुष औषधि से अथवा आयुष चिकित्सक की देखरेख में इलाज कराएं।

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