#फरीदाबाद
पिछले साल शुरू हुआ कोरोना के तांडव से इस साल तक तो सावधानी रख खुद और परिवार को सुरक्षित रख सका, लेकिन जब ज्यादातर खबरिया वाले इस साल ऑक्सीजन खत्म का ऐसा तांडव मचा रहे थे जैसे प्रलय आ गई हो, उसी दौरान अचानक से एक दिन बुखार आ गया। बुखार आते ही दिमाग में सीधा कोविड 19 ने जंप मारी और जैसे उसने कहा कि बता अब कहां जाएगा।

एक रात बुखार में बिताई, सुबह फिर हुआ, डॉक्टर से वीडियो चैट करी, आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए सैंपल दिया, लेकिन डॉक्टर ने जो दवाई बताईं, वह शुरू कर दीं। यहां से शुरू होता है भय से निकलने का दौर। सबसे पहले घर में आने वाला अखबार बंद किया और कमरे में लगे टीवी से केबल का तार निकाल खिड़की के बाहर फेंक दिया। सोशल मीडिया से दूरी बना ली। कुल मिलाकर दूसरे दिन तक मेरे दिमाग से कोरोना का भय काफी हद तक खत्म हो चुका था, क्योंकि डर फैला रहे संसाधनों से मैंने दूरी बना ली थी। सोशल मीडिया पर कई लोग पोस्ट करते हैं मुझे कोराेना हो गया, मेरे लिए दुआ करो, ऐसी कोई पोस्ट मैंने नहीं करी, क्योंकि मेरे लिए दुआ करने वाले अपने बहुत थे। टेस्ट का नतीजा अपेक्षित रूप से पॉजिटिव आया और इस बीच हमारे मित्र ‘दीपक’ की तरह जो हमेशा समाज को सही रास्ता दिखाते हैं, उनका बेहद स्नेह मिला। मुंह से स्वाद गायब हुआ तो नाक से खुशबू, लेकिन दवाईयों और मल्टी विटामिन के दम पर आखिरकार 9 वें दिन बुखार को मात दे दी। इस बीच धन्यवाद करता हूं ब्रह्माकुमारी बहन पूनम का जिन्होंने प्रतिदिन हालचाल जाना और जरूरत पड़ने पर आबू से दवाई तक मंगाई।
कोरोना के आगे हारता है प्रेम तो प्रेम जिताता है कोरोना से
कोरोना होने के साथ ही एक कमरे में खुद को आईसोलेट कर लिया। घर में कहा कि डिस्पोसेबल बर्तन लाओ, जिनको खाने के बाद फेंका जा सके, लेकिन श्रीमति जी मानें तब न। अपने हाथ से कमरे में खाना लाना, नमक या कुछ और ताे नहीं चाहिए, पूछने के लिए वहीं कुर्सी डालकर बैठ जाना। जाने के लिए कहने पर कि एक बंद कमरे में अकेले कैसे रहते हो, थोड़ी बात कर लिया करो, तबियत सुधर जाएगी। उन्होंने अपना प्रेम या लाड़ जो कहें कोरोना को एक दरकिनार रख दर्शा दिया, लेकिन चंद दिनों बाद वह भी कोरोना से ग्रसित हो मेरे कमरे में आ गईं। भाई जब 2 बेड़रूम फ्लैट हो तो एक ही कमरा आईसोलेशन के लिए बचता है।

बालहठ भी होती है खतरनाक 
हमारे 11 साल के शेर चौधरी पवित्र सिंह जाखड़ प्रतिदिन पूछने आते थे कमरे में कि पापा कोराना कैसा है। आखिरकार वह भी चपेट में आ गए। हम तीन कोरोना पॉजिटिव एक कमरे में आईसोलेट रहे, लेकिन समाज में कोई सूचना नहीं दी। हमारे ‘दीपक’ और ब्रह्माकुमारी बहन पूनम की प्रार्थनाओं से सभी ठीक हो गए।

महत्वपूर्ण बातें
– आईसोलेट हों तो पत्नी और बच्चों के प्रेम से दूर रह सख्त रवैया अपनाएं- डिस्पोजल बर्तनों में खाना खाएं
– सबसे बड़ी बात आज की तारीख में खबरिया लोगों से बचें चाहें वह किसी रूप में हों
– आईसोलेशन में जिंदगी में वह सभी कार्य करें जो कॉलेज लाइफ में करते थे, चाहें नाचना, गाना, गीत लिखना आदि
– मेरे नजरिए में बकवास है पुराने दोस्तों से बात करना, क्योंकि भय के अलावा वह कुछ नहीं पैदा करते। यह मेरा व्यक्तिगत मानना है, शायद गलत हो सकता हूं।

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