बिजली विभाग उपभोक्ताओं को भेजे गए बिल की राशि को ऑनलाइन स्वीकार नहीं कर रहा है, इसकी जगह वह दर्शाई गई राशि से लगभग तीन गुना राशि जमा कराने की डिमांड कर रहा है। यह अतिरिक्त राशि क्यों मांगी जा रही है इसका कोई उचित कारण उपभोक्ताओं को नहीं बताया जा रहा है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने बिजली बिल बढ़ोतरी की घोर निंदा करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर उनको उपभोक्ताओं की नाराजगी व चिंता से अवगत कराया है और अचानक की गई इस बिजली बिल बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा कि एक उपभोक्ता द्वारा खर्च की गई बिजली रीडिंग के हिसाब से बिजली का बिल 1410 रुपया आया था जब इस बिल राशि को ऑनलाइन जमा कराने की कार्रवाई की गई तो रुपए 3263 की डिमांड की जा रही है। इसी प्रकार एक बिजली बिल की राशि सिर्फ 569 है अब उसकी जगह रुपए 4544 मांगे जा रहे हैं। बिना किसी सूचना व उचित कारण के इस प्रकार भारी संख्या में की गई बढ़ोतरी से सभी उपभोक्ता परेशान है और वे मारे मारे बिजली दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं से भी कोई सकारात्मक मदद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं अप्रैल-मई में लोगों को अनाज भी खरीदना पड़ता है और बच्चों के एडमिशन के साथ ही कापी किताबें भी खरीदनी होती हैं। इसलिए लोगों की दिक्कतों को बिजली निगम ने ओर बढ़ा दिया है। उन्होंने सरकार व निगम प्रबंधकों से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

बिजली विभाग ने कहा कि बिजली की औसत खपत के अनुसार ली जा रही अग्रिम सुरक्षा राशी
यह मामला गर्माए जाने के बाद बिजली विभाग ने ईमेल के जरिए जारी प्रैस नोट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सभी उपभोक्ताओं को सूचित किया जा रहा है कि हरियाणा एलेक्ट्रिक्सिटी रेगुलेटरी कमिशन (एचईआरसी) के निर्देशानुसार, डीएचबीवीएन ने वर्ष 2019-20 में सभी उपभोक्ताओं की औसत बिजली की खपत के अनुसार बिजली कनेक्शन के लिए अग्रिम सुरक्षा जमा राशि की समीक्षा की है। इसी के चलते वर्तमान ऊर्जा बिल में अग्रिम खपत जमा की राशि भी शामिल की गई है। सभी उपभोक्ताओं से अनुरोध है कि वे अपना बिजली बिल ऑनलाइन जांचें और उसी के अनुसार भुगतान करें। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए उपभोक्ता अपने संबंधित बिजली उपखंड कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.